उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में इस्लामिक कट्टरपंथ की बर्बरता की घटना ने पूरे क्षेत्र को हिलाकर रख दिया है। जवां थाना क्षेत्र के मोहल्ला अहेरिया में 18 वर्षीय हिंदू युवक करण पुत्र मेघ सिंह की कुछ मुस्लिम युवकों ने योजनाबद्ध तरीके से हत्या कर दी। यह दर्दनाक घटना तब हुई जब करण ने मानवीय संवेदनाओं के चलते एक मुस्लिम महिला की मदद की थी। लेकिन यह मदद पड़ोसी कट्टरपंथी परिवार को नागवार गुजरी और करण ने इसकी कीमत उसकी जान लेकर चुकाई।
पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, नोएडा में मजदूरी करने वाला करण छुट्टी पर घर आया था। शनिवार रात (12 अक्टूबर 2025) को वह गांव तेजपुर के नर्सिंग होम से एक मुस्लिम महिला के लिए दवा लेकर लौटा। तभी पड़ोसी मुस्लिम परिवार के लोग उसे लेकर नाराज हो गए। रात करीब 11:30 बजे मोहल्ले के अशद पुत्र नफीस खां सात अन्य आरोपियों के साथ करण को घर से बाहर बुलाने आए। करण ने मना किया तो वे घर में घुस गए, उसे घसीटकर लगभग 200 मीटर दूर एक खंडहर मकान में ले गए और वहां उसकी निर्मम हत्या कर दी।
हत्या के दौरान आरोपियों ने पहले गला रेत दिया और फिर शरीर के ऊपरी हिस्से पर लगातार चाकू से वार कर उसकी जान ले ली। यह पूरी वारदात सुनियोजित और सामूहिक हमले का उदाहरण है, जिसमें मानवता और कानून का खुला उल्लंघन किया गया।
पुलिस को रात 12 बजे सूचना मिली। तत्काल कार्रवाई करते हुए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया और इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया। कुछ ही घंटों में पुलिस ने हत्या में शामिल सभी 8 नामजद आरोपियों असद पुत्र नफीस खां, इद्रीश पुत्र अब्दुल सलाम, नफीस खां पुत्र अब्दुल सलाम, अयान पुत्र शमशाद खां, अनश पुत्र नफीस खां, अरमान पुत्र इद्रीश, अल्तमश पुत्र नफीस खां और चांद पुत्र शमशाद खां को गिरफ्तार कर लिया।
इस घटना से अलीगढ़ में आक्रोश और भय का माहौल है। मृतक के परिजन और स्थानीय नागरिकों ने थाने का घेराव कर कड़ी कार्रवाई तथा कठोर सजा की मांग की है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया है। यह घटना इस बात की सख्त चेतावनी है कि कट्टरपंथ और धार्मिक कटुता समाज के लिए कितना घातक है, और ऐसे अपराधियों को कानून के तहत कठोरतम सजा मिलनी चाहिए।

