उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले से एक ऐसी खबर निकलकर सामने आई है, जिसे सुनकर आधुनिकता और ‘सेकुलरिज्म’ के चश्मे से दुनिया देखने वालों की रूह कांप जाएगी। यह कहानी किसी फिल्म की पटकथा नहीं, बल्कि बस्ती की उन 300 से अधिक हिंदू बेटियों की व्यथा है, जिन्हें ‘अजफरुल हक उर्फ प्रिंस’ नाम के एक शातिर अपराधी और उसके जिहादी गिरोह ने अपनी हवस और व्यापार का जरिया बना लिया। इसे ‘द केरल स्टोरी’ का नया और अधिक भयावह वर्जन कहना अतिशयोक्ति नहीं होगी, क्योंकि यहां शिकार होने वाली लड़कियों की संख्या और अपराध का तरीका रोंगटे खड़े कर देने वाला है।
पहचान बदलकर बिछाया ‘लव जिहाद’ का जाल
मामले का मुख्य सूत्रधार अजफरुल हक उर्फ प्रिंस है, जो बस्ती का एक कुख्यात गैंगस्टर बताया जा रहा है। जांच में सामने आया है कि अजफरुल हक ने अपनी पहचान छिपाकर, हाथ में कलावा बांधकर और खुद को हिंदू (प्रिंस) बताकर भोली-भाली लड़कियों को प्रेम जाल में फंसाना शुरू किया। ‘प्यार मजहब नहीं देखता’ जैसी बातों में आकर कई युवतियां उसके झांसे में आ गईं। आरोपी पहले शादी का झांसा देकर शारीरिक संबंध बनाता था और बेहद शातिर तरीके से उन निजी पलों के अश्लील वीडियो रिकॉर्ड कर लेता था। यही वीडियो आगे चलकर उन लड़कियों की बर्बादी का हथियार बनते थे।
ब्लैकमेलिंग और देह व्यापार की ‘जिहादी मंडी’
एक बार वीडियो हाथ में आने के बाद, अजफरुल और उसका गिरोह अपना असली रंग दिखाना शुरू करता था। युवतियों को वीडियो वायरल करने और परिवार को समाज में बदनाम करने की धमकी दी जाती थी। पीड़िता का आरोप है कि जब उसने शादी के लिए दबाव बनाया, तो उसे प्रताड़ित किया गया। इतना ही नहीं, जब वह इंसाफ की गुहार लेकर आरोपी के घर पहुंची, तो वहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म (गैंगरेप) किया गया।
आरोप बेहद संगीन हैं: इस गिरोह ने केवल यौन शोषण ही नहीं किया, बल्कि उन लड़कियों को ब्लैकमेल कर नेपाल और देश के अन्य राज्यों में देह व्यापार के लिए मजबूर किया। पुलिस जांच में यह संकेत मिले हैं कि यह एक अंतरराष्ट्रीय सेक्स ट्रैफिकिंग रैकेट हो सकता है, जिसके तार नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से जुड़े हैं।
300 लड़कियों की तबाही का आंकड़ा: जांच एजेंसियों के उड़े होश
पीड़िता ने पुलिस को दिए अपने बयान में दावा किया है कि वह अकेली नहीं है। अजफरुल हक और उसके भाई ने मिलकर लगभग 300 से अधिक लड़कियों को इसी तरह अपने जाल में फंसाया है। यह आंकड़ा पुलिस और खुफिया एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। अगर यह दावा पूरी तरह सही निकलता है, तो यह उत्तर प्रदेश के इतिहास का सबसे बड़ा ‘लव जिहाद’ और ‘ह्यूमन ट्रैफिकिंग’ का मामला साबित होगा।
जांच में यह भी सामने आया है कि गिरोह ने लड़कियों को मानसिक रूप से इतना तोड़ दिया था कि वे चाहकर भी विरोध नहीं कर पाती थीं। किसी के भाई को किडनैप करने की धमकी दी गई, तो किसी के पूरे परिवार को जान से मारने का डर दिखाया गया।
माता-पिता और समाज के लिए चेतावनी
यह खबर उन अभिभावकों के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ है जो अपनी बेटियों को आधुनिक सुविधाएं तो देते हैं, लेकिन उनकी संगति और गतिविधियों पर नजर रखना भूल जाते हैं। ‘अब्दुल वैसा नहीं है’ के भ्रम में जीने वाली लड़कियों के लिए बस्ती की यह घटना एक कड़वी हकीकत है। कट्टरपंथी सोच और सुनियोजित तरीके से चलाए जा रहे इस रैकेट ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा केवल पुलिस के भरोसे नहीं, बल्कि सतर्कता से ही संभव है।
पुलिस की कार्रवाई और फरार आरोपियों की तलाश
बस्ती पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए अजफरुल हक उर्फ प्रिंस समेत 8 लोगों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की अत्यंत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मुख्य आरोपी पुलिस की गिरफ्त में है और उससे कड़ी पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब उसके डिजिटल फुटप्रिंट्स, सोशल मीडिया अकाउंट्स और मोबाइल डेटा की फोरेंसिक जांच कर रही है ताकि उस ‘जिहादी मंडी’ के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त किया जा सके। सूत्रों की मानें तो जैसे-जैसे जांच की परतें खुलेंगी, इसमें कई सफेदपोश चेहरों और बाहरी मददगारों के नाम भी सामने आ सकते हैं।

