बिहार सरकार ने राज्य की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और पशुपालकों की आय को दोगुना करने के उद्देश्य से डेयरी क्षेत्र में एक दूरगामी और ऐतिहासिक निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने औपचारिक घोषणा करते हुए कहा है कि अगले दो वर्षों के भीतर राज्य के शत-प्रतिशत गांवों को डेयरी नेटवर्क से जोड़ दिया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के प्रत्येक गांव में एक सक्रिय ‘दुग्ध उत्पादन समिति’ हो और हर पंचायत स्तर पर ‘सुधा दुग्ध बिक्री केंद्र’ का संचालन सुनिश्चित किया जाए।
विस्तार पाता डेयरी नेटवर्क
बिहार के विकास की रूपरेखा साझा करते हुए सरकार ने बताया कि राज्य में कुल 39,073 गांव हैं, जिनमें से 25,593 गांवों में पहले ही दुग्ध उत्पादन समितियों का सफलतापूर्वक गठन किया जा चुका है। अब शेष 13,480 गांवों को आगामी 24 महीनों के भीतर इस संगठित ढांचे के दायरे में लाने के लिए पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग को युद्धस्तर पर कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि ग्रामीण स्तर पर संग्रह केंद्र मजबूत होने से न केवल दूध की बर्बादी रुकेगी, बल्कि किसानों को उनके उत्पाद का पारदर्शी और उचित मूल्य सीधे उनके बैंक खातों में प्राप्त होगा।
महिला उद्यमिता को नया आयाम
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू महिला सशक्तीकरण है। पंचायतों में स्थापित होने वाले नए सुधा बिक्री केंद्रों के संचालन में ‘जीविका दीदियों’ को प्राथमिकता दी जाएगी। मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत लाभान्वित महिलाओं को इन केंद्रों के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में ‘बिजनेस विमेन’ का एक नया वर्ग तैयार होगा, जो स्थानीय स्तर पर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनकर उभरेगा।
सात निश्चय-3 और आत्मनिर्भर बिहार
डेयरी उद्योग को सशक्त करने की यह कवायद राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी कार्यक्रम ‘सात निश्चय-3’ का हिस्सा है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में भी इस योजना के लिए विशेष वित्तीय प्रावधान किए गए हैं। सरकार का मानना है कि डेयरी को एक संगठित उद्योग के रूप में विकसित करने से ग्रामीण क्षेत्रों में केवल आय ही नहीं बढ़ेगी, बल्कि यह कुपोषण के खिलाफ लड़ाई और स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन में भी मील का पत्थर साबित होगा।
बिचौलियों की भूमिका को न्यूनतम कर और सीधे बाजार तक पहुंच सुनिश्चित कर, बिहार सरकार डेयरी सेक्टर को ग्रामीण विकास की रीढ़ बनाने की दिशा में अग्रसर है। यदि यह योजना समयबद्ध तरीके से धरातल पर उतरती है, तो बिहार देश के अग्रणी दुग्ध उत्पादक राज्यों की सूची में अपनी स्थिति और सुदृढ़ कर सकेगा।

