केंद्र सरकार ने बजट 2026 में कृषि क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से लैस करने के उद्देश्य से एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सरकार ने ‘भारत विस्तार’ (Bharat Vistar) नामक एक विशेष एआई (AI) टूल का एलान किया है, जिसने देश भर के किसानों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। यह टूल न केवल किसानों को सूचनात्मक रूप से सशक्त बनाएगा, बल्कि कई मोर्चों पर उन्हें बड़ी राहत देने का वादा भी करता है। यह पहल प्रधानमंत्री के ‘डिजिटल इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर कृषि’ के विजन को धरातल पर उतारने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
वर्चुअल क्लासरूम और अपनी भाषा में सलाह: ‘भारत विस्तार’ एआई टूल की सबसे बड़ी विशेषता इसका ‘वर्चुअल क्लासरूम’ है। इसके माध्यम से किसानों को खेती-बाड़ी की आधुनिक बारीकियों से लेकर सरकार की नवीनतम योजनाओं तक की विस्तृत जानकारी सीधे प्राप्त होगी। डिजिटल साक्षरता की बाधा को दूर करने के लिए इस ऐप में वॉयस कमांड (Voice Command) की सुविधा दी गई है। किसान अपनी क्षेत्रीय भाषा में बोलकर या लिखकर इस टूल से बातचीत कर सकेंगे और कृषि विशेषज्ञों की सलाह ले पाएंगे। शुरुआती चरण में इसे हिंदी और अंग्रेजी में लॉन्च किया जा रहा है, परंतु भविष्य में इसमें सभी भारतीय क्षेत्रीय भाषाओं को जोड़ने की योजना है। इसका मुख्य उद्देश्य रियल-टाइम में सटीक सलाह देकर फसल की उत्पादकता को बढ़ाना है।
सूचनाओं का एकीकृत भंडार: वर्तमान में किसानों को मौसम, सरकारी योजनाओं, कीट नियंत्रण और मंडी भाव जैसी जानकारियों के लिए अलग-अलग वेबसाइटों और पोर्टलों का चक्कर लगाना पड़ता है। ‘भारत विस्तार’ इस समस्या का एकमुश्त समाधान है। यह एक ऐसा एकीकृत प्लेटफॉर्म होगा जहाँ केंद्र और राज्य सरकारों के सभी पोर्टल, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा सुझाए गए आधुनिक तरीके और कृषि सलाह एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। यहाँ किसान न केवल फसल की योजना बना सकेंगे, बल्कि मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर अपनी उपज को सुरक्षित भी रख सकेंगे। साथ ही, कृषि ऋण (Agri Loan), फसल बीमा और डिजिटल मार्केटप्लेस तक उनकी पहुँच अब और भी सुगम हो जाएगी।
एग्रीस्टैक और किसान पहचान पत्र से एकीकरण: इस डिजिटल व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए इसे ‘एग्रीस्टैक’ (AgriStack) और ‘किसान पहचान पत्र’ से जोड़ा जा रहा है। एग्रीस्टैक के तहत किसानों का एक व्यापक डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिसमें उनकी भूमि के रिकॉर्ड, नक्शे और बोई गई फसलों का पूरा विवरण दर्ज होगा। अब तक देश के 16 राज्यों में लगभग 8.4 करोड़ किसानों को डिजिटल आईडी यानी ‘किसान पहचान पत्र’ जारी किए जा चुके हैं। सरकार ने लक्ष्य निर्धारित किया है कि वित्त वर्ष 2026 के अंत तक यह संख्या 9 करोड़ तक पहुँचाई जाए।
पायलट प्रोजेक्ट और भविष्य की राह: कृषि मंत्रालय ने इस दिशा में त्वरित कार्रवाई करते हुए उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान जैसे प्रमुख राज्यों के साथ समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट का कार्य तीव्र गति से चल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार आधार और यूपीआई (UPI) ने देश में वित्तीय क्रांति लाई, उसी तर्ज पर ‘भारत विस्तार’ खेती के ज्ञान को गाँव के अंतिम किसान तक पहुँचाएगा। यह डिजिटल विस्तार न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि जलवायु परिवर्तन के इस दौर में उन्हें ‘क्लाइमेट स्मार्ट’ खेती करने के लिए भी तैयार करेगा।

