संसद के बजट सत्र 2026-27 की शुरुआत आज एक नई ऊर्जा और संकल्प के साथ हुई। संसद के दोनों सदनों—लोकसभा और राज्यसभा—की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने न केवल सरकार के पिछले 11 वर्षों के कामकाज का लेखा-जोखा पेश किया, बल्कि आने वाले 25 वर्षों के लिए ‘विकसित भारत’ की एक स्पष्ट और सशक्त तस्वीर भी देश के सामने रखी। सेंट्रल हॉल में अपने अभिभाषण के दौरान राष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक सुदृढ़ीकरण, अंतरिक्ष विज्ञान, महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सरकार की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं को विस्तार से साझा किया।
विपक्ष के कुछ सदस्यों द्वारा किए गए हंगामे के बीच, राष्ट्रपति ने बेहद सधे हुए और गरिमामय अंदाज में सरकार का पक्ष रखा। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वर्ष 2026 के साथ भारत ने इस सदी के दूसरे और निर्णायक चरण में प्रवेश कर लिया है।
सत्र का गणित: दो चरण और 30 बैठकें राष्ट्रपति के अभिभाषण के साथ ही बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत हो गई है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, यह सत्र दो चरणों में आयोजित किया जाएगा।
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पहला चरण: आज (बुधवार) से शुरू होकर 13 फरवरी तक चलेगा। इसमें राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट प्रस्तुति मुख्य एजेंडा होंगे। 29 जनवरी को आर्थिक सर्वेक्षण (Economic Survey) पेश किया जाएगा, और 1 फरवरी (रविवार) को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण देश का आम बजट पेश करेंगी।
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दूसरा चरण: अवकाश के बाद 9 मार्च से शुरू होकर 2 अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों की अनुदान मांगों पर चर्चा होगी और वित्त विधेयक को पारित किया जाएगा। पूरे सत्र के दौरान कुल 30 बैठकें प्रस्तावित हैं।
राष्ट्रीय सुरक्षा: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ और आतंकवाद पर प्रहार राष्ट्रपति के अभिभाषण का सबसे अहम हिस्सा राष्ट्रीय सुरक्षा पर केंद्रित रहा। उन्होंने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का विशेष उल्लेख करते हुए भारतीय सेना के शौर्य की सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर ने भारत के साहस और संकल्प को पूरी दुनिया के सामने स्थापित किया है। हमारी सेना ने आतंकियों के अड्डों को ध्वस्त कर यह संदेश दिया है कि भारत अपनी संप्रभुता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।”
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कड़ा संदेश दिया कि भविष्य में भी किसी भी आतंकी हमले का जवाब ‘दृढ़ और निर्णायक’ होगा। सिंधु जल समझौते का जिक्र करते हुए उन्होंने इसे भारत की रणनीतिक मजबूती का हिस्सा बताया।
आंतरिक सुरक्षा के मोर्चे पर, राष्ट्रपति ने माओवाद के खिलाफ मिली सफलता को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि माओवादी प्रभाव अब देश के 126 जिलों से सिमटकर केवल 8 जिलों तक रह गया है, जिनमें से सिर्फ 3 जिले ही गंभीर रूप से प्रभावित हैं। 2,000 से अधिक माओवादियों का आत्मसमर्पण सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों के दबाव का परिणाम है।
अर्थव्यवस्था: ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ और 150 वंदे भारत ट्रेनें अर्थव्यवस्था पर बात करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि बीते 11 वर्षों में भारत की आर्थिक स्थिति अभूतपूर्व रूप से मजबूत हुई है। सरकार ने महंगाई दर को नियंत्रित रखने का रिकॉर्ड कायम किया है, जिसका सीधा लाभ मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों को मिला है। बुनियादी ढांचे के विकास का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि आज देश में 150 वंदे भारत ट्रेनें पटरियों पर दौड़ रही हैं, जो आधुनिक भारत की गति का प्रतीक हैं। रेलवे के विकास पर 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया गया है। इसके अलावा, उन्होंने यूरोपीय संघ (EU) के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को गेम-चेंजर बताया। उन्होंने कहा कि इससे सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों को नई गति मिलेगी और युवाओं के लिए रोजगार के असीमित अवसर पैदा होंगे। सरकार पुरानी नीतियों में बदलाव कर ‘रिफॉर्म एक्सप्रेस’ के रास्ते पर तेजी से आगे बढ़ रही है।
सामाजिक न्याय: अंत्योदय का संकल्प ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र को दोहराते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि केंद्र सरकार सामाजिक न्याय के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने आंकड़ों के जरिए सरकार की सफलता की कहानी बयां की:
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आज देश के लगभग 95 करोड़ नागरिकों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल रहा है।
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पिछले एक दशक में करीब 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी (Multidimensional Poverty) से बाहर निकले हैं।
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अनुसूचित जाति (SC) के छात्रों को शिक्षा के लिए 42,000 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति दी जा चुकी है।
राष्ट्रपति ने जोर देकर कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को और अधिक सशक्त बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, भ्रष्टाचार और घोटालों पर लगाम लगाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि जनता के पैसे का सही उपयोग हो।
कृषि और ग्रामीण विकास: खुशहाल किसान, विकसित भारत किसानों को देश की रीढ़ बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ‘खुशहाल किसान’ को ही विकसित भारत का लक्ष्य मानती है। पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में भेजे जा चुके हैं। फूड प्रोसेसिंग क्षमता में 20 प्रतिशत की वृद्धि और मत्स्य पालन में 2014 की तुलना में 105 प्रतिशत की वृद्धि को उन्होंने ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए शुभ संकेत बताया। उन्होंने कहा कि देश अब केवल अनाज उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि तिलहन (Oil Seeds), मधुमक्खी पालन और पशुपालन के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रहा है।
नारी शक्ति: लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक महिला सशक्तिकरण पर सरकार की उपलब्धियों को गिनाते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि देश का विकास तभी संभव है जब आधी आबादी को समान अधिकार मिलें।
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10 करोड़ महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों (SHGs) से जोड़ा गया है।
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सरकार का लक्ष्य 3 करोड़ महिलाओं को ‘लखपति दीदी’ बनाना है, जिसमें से 60 लाख से ज्यादा महिलाएं यह मुकाम हासिल कर चुकी हैं।
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कृषि क्षेत्र में तकनीक को बढ़ावा देने के लिए ‘ड्रोन दीदी’ योजना तेजी से आगे बढ़ रही है।
अंतरिक्ष में भारत की छलांग: ISS से अपना स्पेस स्टेशन तक विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत की प्रगति का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला का अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) तक पहुंचना एक ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत मात्र है। उन्होंने सदन को आश्वस्त किया कि भारत आने वाले वर्षों में अपना खुद का ‘स्पेस स्टेशन’ बनाने की दिशा में काम कर रहा है। गगनयान मिशन और अंतरिक्ष पर्यटन (Space Tourism) के क्षेत्र में भारत की तैयारी यह बताती है कि अंतरिक्ष अब आम भारतीयों की पहुंच से दूर नहीं रहेगा।
पूर्वी भारत का उदय क्षेत्रीय असंतुलन को दूर करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार पूर्वी भारत और पूर्वोत्तर (North East) के विकास को विशेष प्राथमिकता दे रही है। बीते 11 सालों में पूर्वोत्तर में 7,200 से ज्यादा राजमार्ग बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि सुरक्षा और विकास के लिहाज से यह दशक पूर्वोत्तर के लिए निर्णायक साबित हुआ है। आदिवासी इलाकों में 20,000 से ज्यादा गांवों को मुख्यधारा के विकास से जोड़ा जा रहा है।
निष्कर्ष: आत्मनिर्भरता ही आजादी का असली अर्थ अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि आजादी तब तक अधूरी है, जब तक हम आत्मनिर्भर जीवन नहीं जीते। उन्होंने कहा कि सदी के पहले 25 वर्ष भारत के लिए सफलताओं और अनुभवों से भरे रहे हैं और यह वर्ष ‘विकसित भारत’ की यात्रा का एक महत्वपूर्ण आधार स्तंभ है। उन्होंने सभी सांसदों से आह्वान किया कि वे दलगत राजनीति से ऊपर उठकर देश के निर्माण में अपना योगदान दें, क्योंकि जनता की आकांक्षाएं सर्वोच्च हैं।

