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बिहार में NDA 200 पार, मोदी-नीतीश की जोड़ी की आंधी में उड़ गया INDI गठबंधन

By:
अभय प्रताप सिंह
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जनता ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की स्थिर, विकासोन्मुख नेतृत्व वाली जोड़ी पर भरोसा जताते हुए एनडीए को ऐतिहासिक जीत दिलाई है। राहुल गांधी–तेजस्वी यादव की जोड़ी को मतदाताओं ने स्पष्ट रूप से नकार दिया, जिससे महागठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा।

बिहार विधानसभा चुनावों में BJP के नेतृत्व वाले NDA गठबंधन को बंपर बहुमत दिया है और कांग्रेस के नेतृत्व वाले INDI गठबंधन को करारी हार का सामना करना पड़ा है। बिहार की जनता ने स्पष्ट एवं प्रचंड जनादेश से एक बार फिर साबित कर दिया कि वह विकास, सुशासन और स्थिरता की राजनीति पर ही भरोसा करती है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने 243 सीटों वाली विधानसभा में 202 सीटों पर विजय प्राप्त कर न केवल बहुमत का आंकड़ा पार किया, अपितु राज्य के इतिहास की सबसे बड़ी जीत दर्ज की।

बिहार विधानसभा चुनावों की यह विजय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अजेय जोड़ी की जीत है। बिहार की जनता ने राहुल गांधी-तेजस्वी यादव की जोड़ी को पूरी तरह नकार दिया और सिद्ध कर दिया कि जातिवाद एवं परिवारवाद की राजनीति को राज्य अब स्वीकार नहीं करेगा।

चुनाव परिणामों ने साफ बता दिया कि बिहार ने मोदी जी के नेतृत्व वाली डबल इंजन सरकार की योजनाओं एवं नीतीश कुमार के सुशासन मॉडल को ही अपना आशीर्वाद दिया है। भारतीय जनता पार्टी ने 89, जनता दल (यूनाइटेड) ने 85, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) ने 19 तथा हिंदुस्तान आवाम मोर्चा ने 5 सीटें प्राप्त कर एनडीए को अभूतपूर्व सफलता दिलाई। दूसरी ओर, महागठबंधन महज 35 सीटों पर सिमट कर रह गया। प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी का खाता तक नहीं खुला। बिहार चुनाव परिणाम यह दर्शाते हैं कि बिहार की जनता केवल प्रमाणित विकास कार्यों को ही वोट देती है, नई-नई प्रयोगों को नहीं।

सुशासन बाबू का जादू फिर चला, ‘बिहार का मतलब नीतीश कुमार’ स्लोगन बना हकीकत

एनडीए का चुनाव अभियान ‘बिहार का मतलब नीतीश कुमार’ पूरी तरह सार्थक सिद्ध हुआ। ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर कोसी, सीमांचल के कुछ हिस्सों को छोड़कर तथा मगध क्षेत्र में जेडीयू को अप्रत्याशित बढ़त मिली। नीतीश कुमार की सुशासन बाबू की छवि ने एक बार फिर जंगल राज के भय से पीड़ित बिहार को 2005 के बाद का सबसे सुरक्षित और विकासशील राज्य बनाने में अहम भूमिका निभाई। गंगा पर अनेक पुलों का निर्माण, 24 घंटे बिजली, सड़कों का जाल तथा पेयजल योजनाएँ – ये सभी कार्य जनता के दिलों में बसे हुए हैं। एग्जिट पोल्स में भी 67% मतदाताओं ने सुशासन और बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता दी थी, जो अब परिणामों में परिलक्षित हो रही है। योगेंद्र यादव जैसे विश्लेषकों का कहना सही साबित हुआ कि नीतीश की स्थिरता ने एमवाई (मुस्लिम-यादव) समीकरण को तोड़ दिया।

महिला मतदाताओं ने रचा दिया इतिहास, एनडीए को मिला सबसे बड़ा समर्थन

इस चुनाव में महिला मतदाताओं ने पुरुषों से अधिक उत्साह दिखाया – महिला टर्नआउट 71.6% तथा पुरुष 62.8% रहा। महिलाओं ने ‘मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना’ (मासिक भत्ता), शराबबंदी, साइकिल योजना तथा सुरक्षा की गारंटी को देखकर एनडीए को वोट दिया। अनुसूचित जाति एवं पिछड़ी महिलाएँ भी बड़े पैमाने पर एनडीए के साथ आईं। तेजस्वी की ‘रोजगार’ अपील युवाओं में भले ही सही, किंतु महिलाओं के लिए यह तात्कालिक लाभ एवं सुरक्षा की नीतीश की गारंटी के सामने फीकी पड़ गई। यह बिहार की राजनीति में ऐतिहासिक बदलाव है – अब जाति से ऊपर लिंग-आधारित वोटिंग पैटर्न उभर कर आया है।

विकास की लहर में बह गया जातिगत समीकरण, एनडीए ने हर वर्ग को जोड़ा

बिहार की राजनीति को जाति-आधारित कहा जाता था, किंतु इस चुनाव ने इस धारणा को धारणा को तोड़ दिया। अन्य पिछड़ा वर्ग (37%) ने भी एनडीए का साथ दिया। जेडीयू ने कुर्मी-कोइरी, बीजेपी ने राजपूत-भूमिहार, एलजेपी ने पासवान तथा हम ने महादलित दलित को एकजुट किया। मुस्लिम वोट का 20% भी एनडीए की ओर खिसक गया, जिससे महागठबंधन का एमवाई समीकरण धाराशायी हो गया। हिंदुस्तान टाइम्स के विश्लेषण में कहा गया कि एनडीए के जातिगत संतुलन ने विपक्ष के 40% वोट बैंक को 25% तक सीमित कर दिया। प्रशांत किशोर की पार्टी ने भी विपक्ष के वोट काटने में सहयोग किया, जो एनडीए के लिए अप्रत्यत्याशित लाभ बना।

डबल इंजन की रफ्तार ने किया कमाल, योजनाएँ बनी जीत का आधार

केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार की योजनाएँ – पीएम आवास, उज्ज्वला, आयुष्मान भारत, तथा बिहार की ‘सात निश्चय’ – ग्रामीण मतदाताओं ने बड़ी मात्रा में इनका लाभ लिया। टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, 55% लाभार्थियों ने एनडीए को वोट दिया। 24×7 बिजली, नए हाईवे तथा एक्सप्रेसवे – ये सभी कार्यों ने शहरी एवं उपनगरी क्षेत्रों में मतदाताओं को प्रभावित किया। टुडे चाणक्य ने इसे ‘विकास की लहर’ कहा, जो 2010 की तरह 2025 में दोहराया गया।

विपक्ष का बिखराव एवं एनडीए की एकजुटता बनी जीत का कारण

विपक्ष में कांग्रेस का कमजोर प्रदर्शन, वाम दलों की सीमित पहुंच, आरजेडी की ‘परिवर्तन’ अपील का ग्रामीण क्षेत्रों में बेअसर होना – ये सब मिलकर महागठबंधन की हार का कारण बने। इसके विपरीत, मोदी-नीतीश की जोड़ी ने जो लहर पैदा की, उससे उभरने में विपक्ष को वर्षों लगेंगे।

यह जनादेश बिहार को स्थिरता एवं सुशासन की नई ऊंचाई पर ले जाने का संकेत है। नीतीश कुमार दसवीं बार मुख्यमंत्री बनेंगे तथा बिहार, भारत के विकास में मॉडल राज्य बनेगा।

भविष्य का रोडमैप: रोजगार, पलायन पर फोकस करेगी एनडीए

अब एनडीए का लक्ष्य है – बेरोजगार, पलायन रोकना, शिक्षा एवं स्वास्थ्य में क्रांति तथा बिहार को विकसित राज्य बनाना। यह जीत ‘सुशासन क्रांति’ का आरंभ है। अब जिम्मेदारी NDA की है कि वो बिहार की जनता के उस भरोसे को बनाए रखें, जिसके आधार पर बिहार ने NDA को चुना है।

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