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संसद में महिला सम्मान की बातें, घर में बेगम पर अत्याचार, पीटा और घर से बाहर निकाला, चौथी बीवी ने रामपुर से सपा सांसद नदवी की खोली पोल

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अभय प्रताप सिंह
रुमाना ने खुलासा किया कि 2015 में जब उन्होंने बेटे को जन्म दिया, तो नदवी ने उन्हें घर से निकालने की साजिश रची। प्रभावशाली लोगों का दबाव डालकर उनसे वक्फ का घर खाली कराने का कागज साइन करवाया गया। इसके बाद रुमाना को उनके मायके आगरा भेज दिया गया और अब वे वहीं पर रह रही हैं।

उत्तर प्रदेश के रामपुर से समाजवादी पार्टी (सपा) के घिनौने सांसद मोहिबुल्लाह नदवी का महिला-विरोधी चेहरा सामने आया है। उनकी चौथी पत्नी रुमाना परवीन ने यूपी Tak और दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में सांसद के जहरीले कारनामों का खुलासा किया है। रुमाना ने दावा किया कि 2012 में दिल्ली में धोखे से निकाह करने वाले नदवी ने उन्हें बेरहमी से पीटा, अपमानित किया और आखिर में घर से निकाल फेंका।

रामपुर से सपा के सांसद, जो दिल्ली की संसद मार्ग मस्जिद का इमाम भी है, अब अपने महिला-विरोधी चरित्र के लिए कटघरे में है। सरकार और कानून इस जालिम सांसद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि पीड़ित महिलाओं को न्याय मिले और उनकी रक्षा हो।

रुमाना की आपबीती शर्मनाक है। उनका कहना है कि निकाह के बाद नदवी ने उन्हें ‘साइको’ और ‘जानवर’ जैसे गंदे तमाचे मारे। वह बताती हैं कि 2013 में बेटे के जन्म से पहले नदवी ने उनकी पिटाई की, इतना कि उन्हें हाथ जोड़कर माफी मांगनी पड़ी। शैतान ने सलाह दी कि डॉक्टर से कहो कि फिसल गई, ताकि उसकी करतूत छिप जाए। बेटे के जन्म के बाद भी नदवी का क्रूर रवैया नहीं बदला। 2015 में बहाने से उन्हें मायके भेजकर हमेशा के लिए ठुकरा दिया गया। रुमाना ने बताया कि नदवी ने गंदी-गंदी गालियां दीं और बेरहमी से मारा-पीटा, जिससे उनका जीवन नरक बन गया।

सपा सांसद का महिला-विरोधी रिकॉर्ड और भी भयावह है। रुमाना ने खुलासा किया कि नदवी ने पांच शादियां की हैं। पहली पत्नी संभल की थी, जिनकी मृत्यु हो गई; दूसरी रायबरेली की, तीसरी रामपुर की, चौथी रुमाना (आगरा की) और पांचवीं फिर संभल की। रुमाना उनकी चौथे शिकार बनीं, जिन्हें धोखे से फंसाया गया। निकाह के बाद घरवालों ने चेतावनी दी कि नदवी ने दो पत्नियों को पहले भी यूं ही निकाल दिया था। गर्भावस्था में बच्चा गिराने का दबाव बनाया गया, जो मजहबी गुनाह है, लेकिन इस दरिंदे ने बेशर्मी से ऐसा करने को कहा।

रुमाना की जिंदगी तब और दुखों भरी हो गई जब नदवी ने उन्हें घर से बेदखल करने की साजिश रची। बहाने से उन्हें अब्बू के घर भेजा गया और बड़े-बड़े लोगों के दबाव में वक्फ का घर खाली करवाया गया। एक कागज पर ‘घर खाली कर रही हूं’ लिखवाकर उन्हें सड़क पर फेंक दिया गया। अब वे आगरा में अपने पिता के घर रह रही हैं। रुमाना ने 2017 में आगरा फैमिली कोर्ट में गुजारा भत्ता के लिए केस दायर किया, जहां 4,000 रुपये मिलने शुरू हुए। 2024 में इसे 10,000 रुपये और 14 अक्टूबर 2025 को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नदवी को 30,000 रुपये मासिक देने का आदेश दिया।

यह मामला सपा सांसद के महिला-विरोधी चरित्र को उजागर करता है। नदवी का यह व्यवहार समाज और संसद के लिए शर्मिंदगी का कारण है। उत्तर प्रदेश सरकार ने घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं के लिए कानूनी सहायता और हेल्पलाइन जैसी सुविधाएं दी हैं। सांसद पर लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो रही है। रुमाना की हिम्मत अन्य पीड़ितों के लिए प्रेरणा है, जो इस दरिंदगी के खिलाफ आवाज उठा सकती हैं।

यह मामला सिर्फ एक घरेलू विवाद नहीं, बल्कि एक ऐसे नेता का चेहरा उजागर करता है जो संसद में महिलाओं के अधिकारों की बातें करता है, मगर घर में उन्हीं अधिकारों को कुचल देता है। मोहिबुल्लाह नदवी का दोहरा चरित्र अब सवालों के घेरे में है। समाजवादी पार्टी की चुप्पी इस पूरे मामले पर और भी असहज कर रही है।

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