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मुसलमान होकर तेरी हिम्मत कैसे हुई दलित सागर से प्यार करने की ? इसके बाद भाई, अब्बू ने मारकर कर दिया दफ़न

By:
अभय प्रताप सिंह
बागपत में सामने आया हत्याकांड किसी धर्म के नहीं, बल्कि कट्टरपंथी सोच के खतरनाक परिणामों को उजागर करता है। अंतरधार्मिक प्रेम के नाम पर की गई यह जघन्य हत्या बताती है कि जब कानून की जगह निजी ‘इज्जत’ और मजहबी कट्टरता को तरजीह दी जाती है, तो मानवता कुचली जाती है।

उत्तर प्रदेश के बागपत से आई यह दर्दनाक कहानी सिर्फ एक हत्या की नहीं, बल्कि उस सोच की पोल खोलती है जो इंसानियत से ज़्यादा मज़हबी हठ को पूजा समझती है। सानिया एक मासूम युवती, जिसने बस इतना अपराध किया कि उसने प्यार में मजहब नहीं देखा। उसे एक दलित हिंदू युवक सागर से प्यार हो गया था। लेकिन उसके परिवार के लिए यह रिश्ता स्वीकार नहीं था, क्योंकि उनके सिर पर मजहबी कट्टरपंथ का ताज सवार था।

सानिया को अपने ही घरवालों ने मौत दी, दफना दिया, और झूठ बोलते रहे कि वह “बीमारी” से मर गई। लेकिन जब सच ने कब्र की दीवार तोड़ी, तो पूरा देश देखता रह गया कि कैसे इज़्ज़त के नाम पर मजहबी पाखंड इंसानियत का गला घोंट रहा है। इस्लामिक कट्टरपंथ का यही चेहरा है, जहां औरों को “भाईचारे” का पाठ पढ़ाया जाता है, वहीं अपनी बेटी की मोहब्बत को बर्दाश्त नहीं किया जाता। “धर्म से ऊपर इंसानियत” की बातें करने वाले सेक्युलर गिरोह अब खामोश हैं। जो कल तक “लव जिहाद” को फेक कहते थे, अब “लव रीएलिटी” पर आंखें मूंदे बैठे हैं।

यह इस्लामिक कट्टरपंथ का एक और घिनौना चेहरा है, जहां प्यार को मजहब की जंजीरों में जकड़ दिया जाता है। बागपत की मुस्लिम युवती सानिया के मुंह में पहले कपड़ा ठूंसा गया, फिर उसके अपनों ने ही उसका गला दबा डाला। वह तड़पती रही और आखिर में उसकी सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया। सानिया की बेदर्दी से हत्या करने वाले उसके अपने ही पिता, भाई, चचेरे भाई, ताऊ, फूफा और फुफेरा भाई शामिल थे। सानिया को मारकर परिवार ने उसे दफना भी दिया और कह दिया कि अचानक बीमार पड़ने से उसकी मौत हो गई। मगर जब पुलिस ने सानिया की लाश कब्र से निकाली तो पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने सब कुछ बता दिया और सनसनीखेज हत्याकांड सामने आ गया।

आप भी सोच रहे होंगे कि आखिर सानिया ने ऐसा क्या कर डाला जो उसके अपने ही उसके लिए जल्लाद बन गए और उसे तड़पा-तड़पा कर मार डाला? दरअसल सानिया का जुर्म सिर्फ इतना था कि उसने प्यार में धर्म नहीं देखा था। वह हिंदू दलित युवक सागर को अपना दिल दे बैठी थी और उससे प्यार करने लगी थी। वह चाहती थी सागर से शादी करना। मगर उसके परिजनों ने उससे पहले ही उसे कब्र में दफना दिया। इस्लामिक कट्टरपंथ यहां साफ नजर आता है, जहां एक लड़की का दूसरे मजहब से प्यार करना मौत की सजा बन जाता है। ये वो कट्टरता है जो परिवार को भी इंसानियत भूलने पर मजबूर कर देती है।

ये सनसनीखेज मामला बागपत जिले के थाना दोघट क्षेत्र के पलड़ा गांव से सामने आया। यहां सानिया नाम की युवती की हत्या करके उसे कब्र में दफना दिया गया था। वह गांव के ही सागर से प्यार करती थी। मगर सानिया के परिजन इस रिश्ते के खिलाफ थे। जब सानिया नहीं मानी तो परिजनों ने उसे मार डाला। इस्लामिक कट्टरपंथ की जड़ें इतनी गहरी हैं कि यहां “ऑनर किलिंग” को जायज ठहराया जाता है, लेकिन इंसानियत को कुचल दिया जाता है। वो लोग जो “सेकुलरिज्म” की बात करते हैं, अब कहां हैं? क्यों नहीं बोलते जब मजहबी कट्टरता एक मासूम की जान ले लेती है?

इस खौफनाक वारदात का खुलासा तब हुआ जब युवक सागर के पिता ने डायल-112 पर फोन कर हत्या की सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आई और 26 जुलाई 2025 को कब्रिस्तान में खुदाई कर सानिया का शव बाहर निकाला गया। इसके बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। पुलिस ने मामले में शामिल सानिया के परिजनों को गिरफ्तार कर लिया। मगर उसका तहेरा भाई आरिश फरार हो गया। अब सानिया का तहेरा भाई आरिश को भी पुलिस ने पकड़ लिया है। बता दें कि पुलिस पहले ही इस मामले में 6 आरोपियों को जेल भेज चुकी है। अब आरिश की गिरफ्तारी के बाद पूरा सच सामने आ गया है। लेकिन सवाल ये है कि ये कट्टरपंथ कब रुकेगा? कब तक मजहब के नाम पर खून बहता रहेगा?

बता दें कि सानिया के परिजनों ने दलित सागर को भी खूब मारा था। उसके साथ बेरहमी से मारपीट की गई थी। उसे जान से मारने की भी धमकी दी गई थी। मगर सागर पीछे नहीं हटा और सानिया ने भी उसका साथ दिया। आखिर में परिजनों ने अपनी बेटी सानिया को मार डाला। बता दें कि पुलिस ने मामले में अहम किरदार आरिश को गाजियाबाद से गिरफ्तार किया है। इसके ऊपर 25 हजार का इनाम रखा गया था। ये घटना बताती है कि इस्लामिक कट्टरपंथ न सिर्फ परिवारों को तोड़ता है, बल्कि समाज में नफरत की आग फैलाता है। वो लोग जो “पीसफुल कम्युनिटी” की बात करते हैं, अब क्यों चुप हैं? क्यों नहीं इस कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाते?

ये सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक पैटर्न है जहां मजहबी कट्टरता प्यार को कुचल देती है। सानिया जैसी कितनी लड़कियां इस कट्टरपंथ की भेंट चढ़ चुकी हैं? समय आ गया है कि इस्लामिक कट्टरपंथ को एक्सपोज किया जाए, ताकि समाज में सच्ची मोहब्बत और सद्भाव कायम हो सके। चुप्पी तोड़ो, अन्यथा ये जहर फैलता रहेगा।

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