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दिल्ली लाल किला ब्लास्ट का पढ़ा-लिखा आतंकी: डॉ. उमर मोहम्मद

By:
अभय प्रताप सिंह
यह समय है कि समाज और सरकार मिलकर इस जहर को पहचानें। गरीबी या अशिक्षा बहाना नहीं बल्कि डॉ. उमर जैसे केस साबित करते हैं कि वैचारिक कट्टरता ही मूल कारण है। भारत की एकता अटूट है, लेकिन आंतरिक दुश्मनों को उजागर कर ही हम सच्ची सुरक्षा सुनिश्चित कर सकते हैं।

भारत को बार-बार निशाना बनाने वाले इस्लामिक आतंकवाद ने एक बार फिर अपना क्रूर रूप दिखाया है, जब दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले के निकट एक शक्तिशाली कार ब्लास्ट ने निर्दोष नागरिकों की जान ले ली। यह घटना न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है, बल्कि यह भी उजागर करती है कि कैसे वैचारिक कट्टरता, जो इस्लामिक समूहों द्वारा प्रचारित की जाती है, पढ़े-लिखे युवाओं को भी जिहादी रास्ते पर धकेल देती है। संदिग्ध डॉ. उमर मोहम्मद, जो जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले का निवासी है, इस ब्लास्ट को अंजाम देने वाले मुख्य आरोपी के रूप में उभरा है।

यही उमर मोहम्मद उस कार को चला रहा था, जिस कार में दिल्ली में लाल किले के पास ब्लास्ट हुआ

  • उमर मोहम्मद पढ़ा लिखा था
  • भारत के टैक्स पेयर्स के पैसे पर पल रहा था
  • इसके बदले में उसने भारत को आतंकवाद दिया
  • उमर ने श्रीनगर के सरकारी मेडिकल कॉलेज से मेडिकल की पढ़ाई की
  • GMC अनंतनाग में सीनियर पोस्ट पर नौकरी की
  • वर्तमान में AIfalah फरीदाबाद में असिस्टेंट प्रोफेसर था

उमर मोहम्मद जब पैदा हुआ तो उसके बाद उसने

  • सरकारी योजनाओं का लाभ लिया
  • भारत की हवा में सांस ली
  • भारत का अन्न खाया, पानी पिया
  • स्कूल/कॉलेज गया
  • अल्पसंख्यक योजनाओं का लाभ मिला
  • सरकारी सब्सिडी मिली
  • पढ़ाई के दौरान वजीफा मिला
  • पढ़-लिखकर डॉक्टर बना तो नौकरी लगी
  • देश के टैक्स के पैसे से सैलरी मिली
  • सरकार को उम्मीद थी कि उमर पढ़-लिखकर देश की सेवा करेगा
  • तभी उमर को उसकी कौम और कौम का मकसद याद आ गया
  • इसके बाद उमर आतंकी बन गया
  • लाल क़िले के पास उमर ने कार में ब्लास्ट किया
  • ब्लास्ट में अब तक 13 लोगों की मौत हुई है और 28 घायल हैं

क्या अब भी आपको लगता है कि आतंक का कोई धर्म नहीं होता ? क्या अब भी आपको लगता है गरीबी और अशिक्षा के कारण आतंकी बनते हैं ?

तुम उन्हें अपने टैक्स का पैसा देकर पालोगे, पढ़ाओगे और बदले में वो तुम्हें मारेंगे, तुम्हारे देश में आतंकी हमले करेंगे

ये आज से नहीं हो रहा है, सदियों से हो रहा है और ये आगे भी होगा . ये सोच उस ढाई मोर्चे के आधे मोर्चे का भाग है, जिसकी बाद बलिदानी CDS जनरल बिपिन रावत ने की थी

इस आधे मोर्चे पर ऑपरेशन सिंदूर जरूरी है, तरीका चाहे कोई हो

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