अक्सर सोशल मीडिया और समाज में यह जुमला सुनने को मिलता है कि “मेरा अब्दुल वैसा नहीं है” या “मेरा वाला अलग है।” लेकिन इंदौर के पलासिया से सामने आई यह सनसनीखेज वारदात उन तमाम लड़कियों के लिए एक कड़वा सबक है, जो छद्म नामों और मीठी बातों के जाल में अपनी पहचान खो देती हैं। यहाँ सोहेल खान नामक युवक ने ‘लकी’ बनकर न केवल एक हिंदू युवती का शारीरिक शोषण किया, बल्कि उसे अपनी मजहबी कट्टरता की आग में झोंक दिया।
“सवाब” के नाम पर दरिंदगी
इस मामले का सबसे रूह कंपा देने वाला पहलू वह है, जब आरोपी सोहेल खान युवती के साथ दुष्कर्म करने के बाद उससे कहता था- “तू अब पाक हो गई है, इससे हमें सवाब मिलता है।” यह स्पष्ट करता है कि यह केवल एक अपराध नहीं, बल्कि एक गहरी मानसिक ग्रंथि और ‘लव जिहाद’ का वह एजेंडा है जहाँ हिंदू लड़कियों को केवल एक वस्तु समझा जाता है।
इंस्टाग्राम का ‘लकी’ और असलियत का ‘सोहेल’
आरोपी ने इंस्टाग्राम पर ‘लकी’ नाम से फर्जी प्रोफाइल बनाकर युवती से दोस्ती की। तीन साल पहले शुरू हुई यह कहानी इंदौर की प्रसिद्ध ’56 दुकान’ पर पहली मुलाकात के साथ आगे बढ़ी। आरोपी ने युवती को नौकरी दिलाने का झांसा दिया और उसे तिलक नगर स्थित अपने कमरे पर ले गया। वहां उसे नशीला पदार्थ पिलाकर उसका दुष्कर्म किया गया और अश्लील वीडियो बना लिए गए। इन्ही वीडियो के दम पर अगले तीन साल तक ब्लैकमेलिंग और शोषण का खेल चलता रहा।
अजमेर में धर्मांतरण का दबाव और तांत्रिक क्रियाएं
मार्च 2024 में सोहेल खान पीड़िता को जबरन अजमेर दरगाह ले गया। वहाँ उसे बुर्का पहनने और कलमा पढ़ने के लिए मजबूर किया गया। युवती के इनकार करने पर उसे जानवरों की तरह प्रताड़ित किया गया। यही नहीं, आरोपी उसे चंदन नगर स्थित ‘नौशाद बाबा’ के पास भी ले गया, जहाँ उस पर (जादू-टोना) करवाया गया।
कानून का शिकंजा
पीड़िता की हिम्मत और पुलिस की तत्परता से आज सोहेल खान सलाखों के पीछे है। इंदौर पुलिस ने दुष्कर्म, ब्लैकमेलिंग और धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस को पीड़िता से कई पुख्ता सबूत और वीडियो मिले हैं। लेकिन सवाल अभी भी वही है कि आखिर लव जिहाद का ये जहरीला खेल कब ख़त्म होगा और आखिर हिंदू लड़कियां कब इस बात को समझेंगी ?

