महाराष्ट्र के अमरावती जिले का शांत इलाका आज एक ऐसी आग में जल रहा है, जिसकी तपिश पूरे देश में महसूस की जा रही है। परतवाड़ा और अचलपुर की गलियों से जो सच निकलकर सामने आया है, उसने आधुनिक समाज के चेहरे पर तमाचा जड़ दिया है। यह कहानी किसी एक अपराधी की सनक की नहीं है, बल्कि यह ‘लव जिहाद’ के उस सोचे-समझे मॉड्यूल की है, जिसे बेहद खामोशी और शातिराना ढंग से अंजाम दिया जा रहा था। इस पूरे कांड का केंद्र बिंदु है 19 वर्षीय मोहम्मद अयान उर्फ अहमद तनवीर, जिसने अपनी उम्र से कई गुना बड़ा अपराध कर डाला है।
कोचिंग सेंटर: जहाँ कलम की जगह ‘हवस’ का जाल बिछा था
अमरावती के प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान, जहाँ माता-पिता अपनी बेटियों को डॉक्टर और इंजीनियर बनाने का सपना लेकर भेजते हैं, वहाँ अयान जैसा शिकारी घात लगाकर बैठा था। अयान खुद बहुत अधिक शिक्षित नहीं था, लेकिन उसने ‘आकाश कोचिंग’ और ‘फ्यूचर हंट’ जैसे संस्थानों में केवल इसलिए दाखिला लिया ताकि वह नीट (NEET) की तैयारी कर रही मेधावी हिंदू, सिख और ईसाई लड़कियों तक पहुँच सके।
यह कोई सामान्य दोस्ती नहीं थी। अयान सांस्कृतिक कार्यक्रमों और कॉमन क्लासरूम्स का इस्तेमाल शिकार चुनने के लिए करता था। 15, 16 और 17 साल की मासूम बच्चियां, जो अभी दुनियादारी की समझ भी नहीं रखती थीं, अयान के निशाने पर थीं। उसने अपनी पहचान को एक ‘कूल’ और ‘मददगार’ लड़के के रूप में पेश किया, ताकि लड़कियां उस पर आसानी से भरोसा कर सकें।
19 साल का ‘शिकारी’ और 180 शिकार: एक गहरी साजिश के संकेत
हैरानी की बात यह है कि एक 19 साल का लड़का, जिसके पिता एक मामूली ऑटोमोबाइल की दुकान चलाते हैं, वह 180 से अधिक लड़कियों को अपने जाल में फंसाने में कामयाब कैसे हो गया? पुलिस की जांच में सामने आया है कि अयान और उसके गैंग (उजेर खान, मोहम्मद साद और तरबेज खान) ने मिलकर 300 से अधिक अश्लील वीडियो बनाए।
यह संख्या डराने वाली है। क्या यह संभव है कि एक साधारण पृष्ठभूमि का लड़का अकेले इतने बड़े स्तर पर संसाधनों का इंतजाम कर ले? अयान के पास महंगी लग्जरी गाड़ियाँ थीं, वह लड़कियों को महंगे तोहफे देता था और उन्हें शहर के सबसे आलीशान होटलों में ले जाता था। यह सवाल उठना लाजिमी है कि इस ‘लव जिहाद प्रोजेक्ट’ की फंडिंग कहाँ से हो रही थी? क्या अयान सिर्फ एक मोहरा है और इसके पीछे कोई बड़ा मजहबी संगठन काम कर रहा है?
डिजिटल जिहाद: स्नैपचैट और उर्दू ग्रुप्स का काला सच
अयान का खेल सिर्फ शारीरिक शोषण तक सीमित नहीं था। जैसे ही कोई लड़की उसके चंगुल में आती, उसे Snapchat और Telegram पर बने उन गोपनीय ग्रुप्स में शामिल किया जाता जिनके नाम उर्दू में थे। इन ग्रुप्स में लड़कियों का व्यवस्थित तरीके से ‘ब्रेनवॉश’ किया जाता था।
उन्हें इस्लामिक उपदेश सुनाए जाते, उनके धर्म (हिंदू, सिख, ईसाई) को नीचा दिखाया जाता और उन्हें यह यकीन दिलाया जाता कि उनकी मुक्ति सिर्फ इस्लाम कबूल करने में है। यह शुद्ध रूप से एक ‘मजहबी धर्मांतरण’ का रैकेट था। सोशल मीडिया पर वायरल हुई तस्वीरों में कई हिंदू लड़कियां हिजाब और बुर्के में नजर आ रही हैं। अब ये लड़कियां मुस्लिम थीं या फिर हिंदू लड़कियों को इन्हें पहनने के लिए मजबूर किया गया था, इसकी पहचान अभी बाकी है, बरहाल मामला अभी भी जांच के दायरे में है।
वीडियो कांड: ब्लैकमेलिंग का वह भयानक चक्रव्यूह
अयान की कार्यप्रणाली बेहद खौफनाक थी। वह लड़कियों को झांसे में लेकर होटल के कमरों में ले जाता और वहाँ की गई गतिविधियों के वीडियो गुपचुप तरीके से रिकॉर्ड कर लेता। एक बार वीडियो हाथ लग जाने के बाद, अयान का ‘मजहबी चेहरा’ बाहर आ जाता था। फिर शुरू होता था ब्लैकमेलिंग का वह दौर, जिसमें लड़कियों को अपनी अस्मत बचाने के लिए अयान की हर बात माननी पड़ती थी। कई लड़कियों को वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उन्हें इस्लाम की ओर धकेलने की कोशिश की गई।
प्रशासन का एक्शन: बुलडोजर और पुलिस की ‘मजहबी परेड’
जब यह मामला राज्यसभा सांसद डॉ. अनिल बोंडे के संज्ञान में आया और हिंदू संगठनों ने मोर्चा खोला, तब जाकर पुलिस प्रशासन हरकत में आया। पुलिस ने अयान को गिरफ्तार करने के बाद परतवाड़ा और अचलपुर की सड़कों पर उसकी परेड निकाली। यह परेड उन जिहादी तत्वों के लिए एक संदेश था जो हिंदू बेटियों को सॉफ्ट टारगेट समझते हैं।
इसके साथ ही, राज्य सरकार के आदेश पर अयान के घर के अवैध हिस्सों को बुलडोजर से ढहा दिया गया। यह कार्रवाई जरूरी थी ताकि समाज में यह संदेश जाए कि बेटियों की इज्जत से खिलवाड़ करने वालों का वजूद मिटा दिया जाएगा।
एक संगठित अपराध: अयान और उसके साथियों का मंसूबा
अयान के साथ पकड़े गए उजेर खान, मोहम्मद साद और तरबेज खान की भूमिका भी उतनी ही संदिग्ध है। यह पूरा गैंग मिलकर एक ‘टारगेट’ सेट करता था। इनका मकसद सिर्फ शारीरिक सुख नहीं, बल्कि एक खास वर्ग की लड़कियों की अस्मत लूटकर उन्हें मानसिक रूप से तोड़ना और समाज में डर पैदा करना था। 180 लड़कियों का आंकड़ा यह साबित करने के लिए काफी है कि यह कोई ‘प्रेम प्रसंग’ नहीं बल्कि ‘मजहबी युद्ध’ का एक हिस्सा है।
समाज को जागने की जरूरत है
अमरावती का यह कांड हमारे समाज के लिए एक वेक-अप कॉल है। 19 साल का अयान सिर्फ एक अपराधी नहीं, बल्कि उस सोच का प्रतिनिधि है जो ‘लव जिहाद’ को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है। कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा से लेकर सोशल मीडिया के इस्तेमाल तक, हर स्तर पर सतर्कता की आवश्यकता है। आज 180 बेटियां अयान का शिकार हुई हैं, अगर आज हम चुप रहे तो कल यह संख्या और बढ़ सकती है।
अमरावती पुलिस अब इस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। अयान जैसे जिहादियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो इतिहास में मिसाल बने, ताकि फिर कोई अयान किसी हिंदू बेटी की तरफ आंख उठाकर देखने की हिम्मत न कर सके।

