तमिलनाडु की विधानसभा मंगलवार को एक बार करोड़ों हिंदुओं की आस्था के अपमान का गवाह बनी। विपक्ष के नेता और डीएमके विधायक उदयनिधि स्टालिन ने सदन की गरिमा को दरकिनार करते हुए एक बार फिर ‘सनातन विरोधी’ एजेंडे को हवा दी। उन्होंने न केवल सनातन धर्म के उन्मूलन की अपनी विवादित मांग को दोहराया, बल्कि इसे खत्म करने के संकल्प को फिर से सार्वजनिक मंच पर रखा।
करोड़ों की आस्था पर प्रहार
अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए कहा, “सनातन, जिसने लोगों को बांटा है, उसे खत्म कर देना चाहिए।” हैरानी की बात यह है कि जब वह लोकतंत्र के मंदिर (विधानसभा) के भीतर लाखों लोगों के धर्म और संस्कृति को मिटाने की बात कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय भी वहां मौजूद थे। यह बयान सीधे तौर पर उन करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाओं पर प्रहार है जो सनातन को अपने जीवन का आधार मानते हैं।
सनातन की तुलना बीमारियों से करने का पुराना इतिहास
उदयनिधि का यह हिंदू विरोधी चेहरा पहली बार सामने नहीं आया है। 2023 में भी उन्होंने सनातन धर्म को ‘मच्छर, डेंगू, मलेरिया और कोरोना’ जैसी बीमारियों की संज्ञा दी थी। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि सनातन का विरोध करना काफी नहीं है, बल्कि इसे डेंगू की तरह मिटाना होगा। अपनी इस घृणित टिप्पणी के लिए माफी मांगने के बजाय उन्होंने ढिठाई से कहा था कि ‘मैं इसे लगातार कहूंगा।’ आज विधानसभा में उन्होंने अपने उसी हेट स्पीच वाले एजेंडे को फिर से दोहराकर यह साबित कर दिया कि उन्हें बहुसंख्यक समाज की आस्था की कोई परवाह नहीं है।
बीजेपी का करारा पलटवार: ‘ईश्वरीय दंड के लिए तैयार रहें’
भारतीय जनता पार्टी ने उदयनिधि के इस घोर अपमानजनक बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। बीजेपी आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने इसे ‘कोरा अहंकार’ करार देते हुए उदयनिधि को चेतावनी दी। मालवीय ने X पर लिखा कि पिछली बार जब उन्होंने सनातन को “मिटाने” की बात कही थी, तो अदालतों ने इसे ‘हेट स्पीच’ माना था और जनता ने उनकी पार्टी को सत्ता से बेदखल कर विपक्ष में बैठा दिया था।
अमित मालवीय ने कड़े शब्दों में कहा, “हो सकता है कि वह आज विधायिका की कानूनी सुरक्षा की आड़ ले रहे हों, लेकिन लाखों लोगों की आस्था का मजाक उड़ाने की भी एक सीमा होती है। कुछ सीमाएं ऐसी होती हैं जिन्हें पार करने पर गंभीर परिणाम भुगतने ही पड़ते हैं। यह राजनीतिक साहस नहीं, बल्कि विनाशकारी अहंकार है। इस बार, ईश्वरीय दंड अत्यंत भीषण होगा।”
उदयनिधि के इस बयान ने एक बार फिर स्पष्ट कर दिया है कि सत्ता और राजनीति की आड़ में किस तरह सनातन धर्म को निशाना बनाया जा रहा है। अब देखना यह है कि इस अपमान के खिलाफ देश की जनता और न्यायपालिका क्या रुख अपनाती है।

