वर्तमान में ईरान युद्ध के कारण पूरी दुनिया में पेट्रोल, डीजल और एलपीजी (LPG) की सप्लाई चेन चरमरा गई है। भारत सरकार लगातार इस संकट का समाधान खोजने में जुटी है, वहीं आम जनता गैस सिलेंडरों के लिए लंबी-लंबी कतारों में खड़ी है। लेकिन इस राष्ट्रीय आपदा के बीच एक विशेष वर्ग ऐसा भी है जो इसे ‘जिहादी अवसर’ के रूप में इस्तेमाल कर रहा है। लव जिहाद, लैंड जिहाद और थूक जिहाद के बाद अब भारत में ‘सिलेंडर जिहाद’ का नया और खतरनाक चेहरा सामने आया है।
देशभर में बरामदगी के चौंकाने वाले आंकड़े
देश के अलग-अलग कोनों से मिल रही खबरें स्पष्ट करती हैं कि यह कोई सामान्य कालाबाजारी नहीं, बल्कि एक संगठित साजिश है। हालिया छापों में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे रोंगटे खड़े कर देने वाले हैं:
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झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में जावेद, आमिर और उनके साथियों ने मिलकर 507 सिलेंडरों की भारी चोरी को अंजाम दिया
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हापुड़: उत्तर प्रदेश के हापुड़ में रेहान के ठिकाने से 55 गैस सिलेंडर बरामद किए गए हैं
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फारबिसगंज: बिहार के फारबिसगंज में इमरान और साबिर के पास से 250 सिलेंडर जब्त किए गए
- सासाराम: बिहार के सासाराम से रिजवान और कामरान को 11 सिलेंडरों के साथ गिरफ्तार किया गया है
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जयपुर: राजस्थान के जयपुर में अवैध गैस के धंधे में लिप्त इस्लाम को 22 सिलेंडरों के साथ पकड़ा गया
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रतलाम: मध्य प्रदेश के रतलाम में शहजाद के यहाँ से 31 सिलेंडर बरामद हुए
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बिजनौर: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में सिलेंडर चोरी करने वाला दिलशाद गिरफ्तार हुआ
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बरेली: उत्तर प्रदेश के बरेली के मीरगंज में नाजिर के पास से 15 सिलेंडर मिले
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गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश गाजियाबाद के नहली गांव से जावेद को 14 सिलेंडरों के साथ दबोचा गया
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धुबरी: असम के धुबरी में अब्दुल हकीम के यहाँ से 24 सिलेंडर बरामद हुए
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बनगांव: बंगाल के बनगांव में विशु शेख के पास से 24 सिलेंडर बरामद हुए
आपदा में अवसर या देश के खिलाफ साजिश?
यह बेहद चिंताजनक है कि जब देश ऊर्जा संकट से जूझ रहा है, तब एक ही वर्ग के लोग इतनी बड़ी मात्रा में आवश्यक वस्तुओं की जमाखोरी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह ‘सिलेंडर जिहाद’ सीधे तौर पर देश की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की रसोई पर हमला है। चोरी और अवैध डंपिंग के जरिए न केवल कृत्रिम किल्लत पैदा की जा रही है, बल्कि भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री (LPG) को संदिग्ध स्थानों पर एकत्र करना सुरक्षा के लिहाज से भी एक बड़ा खतरा हो सकता है।
ईरान युद्ध के चलते उत्पन्न हुए हालातों का फायदा उठाकर देश के भीतर रसद को बाधित करना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है। जाँच एजेंसियाँ अब इस बात की तहकीकात कर रही हैं कि क्या इन सभी गिरफ्तारियों और बरामदगी के पीछे कोई केंद्रीय नेटवर्क काम कर रहा है।

