झारखंड का सीमावर्ती जिला साहिबगंज इन दिनों एक गंभीर सामाजिक और सुरक्षा संबंधी चुनौती से जूझ रहा है। जिले की बदलती जनसांख्यिकी (Demography) और विशेष रूप से राजमहल तथा उधवा प्रखंडों में बढ़ते ‘लव जिहाद’ के मामलों ने स्थानीय प्रशासन और समाज को चिंता में डाल दिया है। आरोप है कि बांग्लादेशी घुसपैठ से प्रभावित इस क्षेत्र में एक संगठित तंत्र सक्रिय है, जो हिंदू और आदिवासी युवतियों को प्रेम जाल में फंसाकर उनका शारीरिक, मानसिक और धार्मिक शोषण कर रहा है।
शाहिद अनवर मामला: पहचान छिपाकर रचाई शादी
हाल ही में राधानगर थाना क्षेत्र के पहाड़गांव निवासी शाहिद अनवर का मामला सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि युवतियों को फांसने के लिए किस हद तक हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। शाहिद ने राजमहल की एक हिंदू लड़की को प्रेम जाल में फंसाया और अपनी पहचान छिपाकर दिल्ली के एक आर्य समाज मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी कर ली।
पीड़िता के अनुसार, शादी के कुछ समय बाद ही असलियत सामने आने लगी। शाहिद और उसके परिजन युवती पर प्रतिबंधित मांस खाने, बुरका पहनने और नमाज पढ़ने के लिए दबाव बनाने लगे। प्रताड़ना से तंग आकर युवती किसी तरह वहां से भागकर अपने घर पहुंची और आपबीती सुनाई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी शाहिद अनवर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
विगत की रूह कंपा देने वाली घटनाएं
साहिबगंज और आसपास के क्षेत्रों में यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में कई ऐसी घटनाएं हुई हैं जिन्होंने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया:
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रेबिका पहाड़िन हत्याकांड (2022): बोरियो के दिलदार अंसारी ने आदिम जनजाति की युवती रेबिका से दूसरी शादी की थी। जब रेबिका ने साथ रहने की जिद की, तो उसकी गला दबाकर हत्या कर दी गई और साक्ष्य मिटाने के लिए शव के कई टुकड़े कर दिए गए।
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सुशीला हांसदा मामला: करीब चार वर्ष पूर्व बरहेट की सुशीला हांसदा को अरबाज खान नामक युवक ने प्रेम जाल में फंसाया। बाद में उसे मानव तस्करों को बेचने की कोशिश की गई। विरोध करने पर सुशीला की हत्या कर दी गई और उसके शव को दुमका के जंगलों में जला दिया गया।
संगठित गिरोह की सक्रियता की आशंका
स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे कोई व्यक्तिगत कारण नहीं, बल्कि एक सुनियोजित और संगठित गिरोह काम कर रहा है। राजमहल-उधवा इलाके में मुस्लिम युवकों द्वारा हिंदू नाम रखकर या पहचान छिपाकर लड़कियों से दोस्ती करना एक सामान्य पैटर्न बन गया है। कानूनी रूप से बालिग होने के कारण लड़कियां अपनी मर्जी से फैसले लेती हैं, लेकिन जब तक उन्हें धोखे का एहसास होता है, तब तक वे गहरे संकट में फंस चुकी होती हैं। लोकलाज के कारण भी कई परिवार पुलिस तक नहीं पहुंच पाते, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद हैं।
यूपी-एमपी की तर्ज पर सख्त कानून की मांग
इन बढ़ती घटनाओं को देखते हुए क्षेत्र में सख्त कानून की मांग तेज हो गई है। राजमहल की प्रसिद्ध समाजसेवी माधवी लता मंडल ने इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “हमारी भोली-भाली बेटियों को छल का शिकार बनाया जा रहा है। पहचान छिपाकर की जाने वाली शादियां न केवल अपराध हैं, बल्कि समाज के लिए कलंक हैं।”
उन्होंने मांग की है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तराखंड की तर्ज पर झारखंड में भी ‘गैर कानूनी धर्मांतरण निषेध कानून’ को तत्काल प्रभाव से लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस विषय में समर्थन देने की अपील की है ताकि भविष्य में बेटियों को धोखाधड़ी और प्रलोभन से बचाया जा सके।
साहिबगंज की स्थिति यह चेतावनी दे रही है कि यदि समय रहते प्रशासनिक और कानूनी कदम नहीं उठाए गए, तो क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना पूरी तरह छिन्न-भिन्न हो सकता है। बेटियों की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखना वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गई है।

