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थोक महंगाई में बड़ा उछाल: फरवरी में 2.13% के साथ 12 महीने के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँचे आंकड़े

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स्वास्तिक सहारा वेब डेस्क
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अनुसार, फरवरी 2026 में थोक मूल्य सूचकांक जनवरी 2026 की तुलना में 0.25 प्रतिशत बढ़ा है। मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों, बेसिक मेटल्स, टेक्सटाइल्स और कई खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि इसके प्रमुख कारण रहे हैं।

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (आर्थिक सलाहकार कार्यालय) ने सोमवार, 16 मार्च 2026 को फरवरी माह के लिए थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के अनंतिम आंकड़े जारी किए। रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2026 में वार्षिक आधार पर थोक महंगाई दर बढ़कर 2.13% हो गई है। यह जनवरी 2026 में दर्ज 1.81% की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है और पिछले एक वर्ष (12 महीने) का उच्चतम स्तर है।

महंगाई की मुख्य प्रवृत्तियाँ और तुलनात्मक विश्लेषण

आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि यह लगातार चौथा महीना है जब थोक महंगाई की दर में निरंतर वृद्धि देखी गई है। दिसंबर 2025 में यह दर मात्र 0.83% थी, जो अब तेजी से बढ़कर 2% के स्तर को पार कर गई है। हालांकि, पिछले वर्ष फरवरी 2025 (2.38% – 2.45%) की तुलना में यह अभी भी कम है, लेकिन वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों के कारण इसके और ऊपर जाने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।

क्षेत्रवार प्रदर्शन (Sectoral Impact)

  1. प्राथमिक वस्तुएं (Primary Articles): इस समूह का भार सूचकांक में 22.62% है। इसकी महंगाई दर जनवरी के 2.21% से बढ़कर फरवरी में 3.27% हो गई। हालांकि, महीने-दर-महीने आधार पर इस सूचकांक में 0.52% की मामूली गिरावट आई है, लेकिन वार्षिक आधार पर दबाव बरकरार है।

  2. खाद्य सूचकांक (Food Index): खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर में भारी बदलाव देखा गया है। दिसंबर 2025 में यह नकारात्मक (-0.05%) थी, जो जनवरी में 1.41% और फरवरी में बढ़कर 1.85% हो गई है।

  3. ईंधन और ऊर्जा (Fuel & Power): इस समूह में मुद्रास्फीति की दर नकारात्मक (-3.78%) बनी हुई है, लेकिन पिछले महीने (-4.01%) की तुलना में इसमें सुधार (बढ़त) देखी गई है। खनिज तेलों की कीमतों में 2.05% की वृद्धि दर्ज की गई है।

  4. विनिर्मित उत्पाद (Manufactured Products): थोक सूचकांक में 64.23% की सर्वाधिक हिस्सेदारी रखने वाले इस क्षेत्र में महंगाई दर 2.86% से बढ़कर 2.92% रही। कुल 22 उप-समूहों में से 16 में कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई है।

वस्तु-विशिष्ट उतार-चढ़ाव

खाद्य टोकरी में मिश्रित रुझान देखने को मिले। जहाँ एक ओर सब्जियों (आलू में 27.42% की कमी और प्याज में 40.95% की कमी) और दालों (5.92% गिरावट) की कीमतों में राहत मिली है, वहीं दूसरी ओर फलों (3.57%), दूध (3%), और अंडा, मांस व मछली (5.36%) की कीमतों में तेजी आई है। गेहूं की कीमतों में भी 4.43% की वार्षिक गिरावट दर्ज की गई है।

वैश्विक कारक और भविष्य की चुनौतियां

विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि वर्तमान में मध्य पूर्व (इजराइल, अमेरिका और ईरान) में चल रहा संघर्ष भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। यदि यह तनाव लंबा खींचता है, तो वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं। कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर माल ढुलाई (Logistics) पर पड़ेगा, जिससे अंततः दैनिक उपभोग की वस्तुओं की कीमतों में और अधिक उछाल आने की संभावना है।

उल्लेखनीय है कि इसी अवधि में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई भी बढ़कर 3.21% हो गई है, जो यह दर्शाता है कि थोक स्तर पर बढ़ रही कीमतें अब धीरे-धीरे खुदरा बाजार को भी प्रभावित कर रही हैं।

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