अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर निर्माण के बाद अब सनातन धर्म की एक और बड़ी जीत हुई है। मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक भोजशाला, जो सदियों से मुगलिया अतिक्रमण और विवादों के साये में थी, अब पूर्णतः स्वतंत्र हो गई है। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक युगांतकारी निर्णय सुनाते हुए भोजशाला को ‘मंदिर’ घोषित कर दिया है। यह फैसला हिंदू समाज के उस अदम्य साहस और धैर्य की जीत है, जो पिछले 700 वर्षों से अपनी सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए संघर्ष कर रहा था।
राजा भोज की ज्ञानस्थली और मुगलिया बर्बरता का इतिहास
इतिहास के पन्नों को पलटें तो सन 1034 में महान राजा भोज ने धार में ‘सस्वती सदन’ का निर्माण कराया था। यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि विश्व प्रसिद्ध संस्कृत पाठशाला थी, जहाँ खगोल विज्ञान, योग, दर्शन, संगीत और व्याकरण की शिक्षा दी जाती थी। यहाँ माता सरस्वती (वाग्देवी) की एक भव्य प्रतिमा स्थापित थी, जिसे आक्रांता अपने साथ ले गए और वर्तमान में वह लंदन के संग्रहालय में है।
सन 1305 में अलाउद्दीन खिलजी की बर्बरता ने इस पवित्र स्थान को क्षति पहुँचाई। इसके बाद 1401 में दिलावर खां गोरी और 1514 में महमूद खिलजी द्वितीय ने मंदिर के ध्वंसावशेषों पर जबरन कब्जा कर इसे ‘कमाल मौला मस्जिद’ का रूप देने का कुत्सित प्रयास किया। सदियों तक हिंदू समाज अपनी माँ वाग्देवी के स्थान की मुक्ति के लिए बलिदान देता रहा।
ASI की रिपोर्ट ने खोला सत्य का मार्ग
भोजशाला का भाग्य वर्ष 2024 में तब बदला जब हाईकोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को वैज्ञानिक सर्वे के निर्देश दिए। करीब 98 दिनों तक चले इस विस्तृत सर्वे में आधुनिक तकनीकों जैसे जीपीआर (GPR), कार्बन डेटिंग और वीडियोग्राफी का उपयोग किया गया। ASI की रिपोर्ट ने वैज्ञानिक प्रमाणों के साथ यह सिद्ध कर दिया कि इस ढांचे का मूल स्वरूप एक विशाल हिंदू मंदिर का है। इसी रिपोर्ट को आधार मानते हुए हाईकोर्ट ने अपना अंतिम निर्णय सुनाया।
हाईकोर्ट का ऐतिहासिक निर्णय
न्यायालय ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से कहा कि भोजशाला परिसर एक मंदिर ही है। कोर्ट ने निम्नलिखित महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं:
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नमाज पर पूर्ण रोक: अब भोजशाला परिसर में किसी भी प्रकार की नमाज या इस्लामिक गतिविधि नहीं होगी। यहाँ केवल हिंदू विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाएगी।
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मस्जिद पक्ष को अलग जमीन: कोर्ट ने न्यायोचित रुख अपनाते हुए कहा कि यदि मुस्लिम पक्ष चाहे, तो वह सरकार से अलग जमीन के लिए आवेदन कर सकता है। सरकार उन्हें मस्जिद निर्माण हेतु पृथक भूमि उपलब्ध कराएगी।
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वाग्देवी की वापसी: कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि इंग्लैंड के म्यूजियम में रखी माता वाग्देवी की मूल प्रतिमा को भारत वापस लाने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज किए जाएं।
हिंदू पक्ष की खुशी
हिंदू पक्ष के वरिष्ठ वकील विष्णु शंकर जैन ने इस फैसले को ‘धर्म की विजय’ बताया है। उन्होंने कहा कि सत्य को अधिक समय तक दबाया नहीं जा सकता। 6 अप्रैल 2026 से शुरू हुई नियमित सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की ओर से सलमान खुर्शीद ने दलीलें दी थीं, लेकिन पुरातात्विक साक्ष्यों के सामने अतिक्रमणकारी दावे टिक नहीं सके।
यह निर्णय न केवल धार के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए सांस्कृतिक पुनर्जागरण का क्षण है। अंततः मुगलिया अतिक्रमण की हार हुई और माता सरस्वती का वह पावन सदन अब दोबारा मंत्रोच्चार और शंखनाद से गुंजायमान होगा।

